Kavya Mimansa (काव्यमीमांसा 1-5 अध्यायः)

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Dr. Chandramauli Dwivedi - Sanskrit & Hindi

Kavya Mimansa (काव्यमीमांसा 1-5 अध्यायः)

काव्यमीमांसा 1-5 अध्यायः (Kavya Mimansa) प्रथम अध्याय “अथातः काव्यं मीमांसिष्यामहे” से आरम्भ है। इस प्रकार ग्रन्थ का आरम्भ दर्शनशास्त्रों में मिलता है प्रारम्भ का अर्थ शब्द ओंकार के समान पवित्र एवं मङ्गलवाचक माना गया है तथा इसके बाद अतः शब्द अधिकारसूचक जैसे – अथातो ब्रह्मजिज्ञासा, अथातो धर्मजिज्ञासा आदि। इस अध्याय में काव्य का सम्बन्ध श्रीकण्ठ एथ परमेष्ठी से किया गया है। सर्वप्रथम श्रीकण्ठ ने इस काव्यका उपदेश अपने शिष्यों में किया है। प्रायः अनेक शास्त्र उनकी अनादि-परम्परा को कायम रखने के लिए ब्रह्मा या शिय से ही प्रोक्त दिखलाये गए हैं। इससे इनकी प्रामाणिकता भी सिद्ध होती है। इसके बाद शिःय परम्परा का क्रम चलता है इसे गुरुपर्वक्रम कहा जाता है।

Author : Dr. Chandramauli Dwivedi

Publication : Bharatiya Vidya Sansthan

Language : Sanskrit & Hindi

Edition : 1st

Pages : 112

Cover : Paper Back

ISBN :        -

Size : 12 x 2 x 19 ( l x w x h )

Weight : 

Item Code : BVS 0081

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