Gauri Kanchalika Tantram (गौरीकाञ्चालिकातन्त्रम्)
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Ajay Kumar Uttam - Sanskrit & Hindi - Bharatiya Vidya Sansthan
Gauri Kanchalika Tantram (गौरीकाञ्चालिकातन्त्रम्)
गौरीकाञ्चालिकातन्त्रम् (Gauri Kanchalika Tantram) तान्त्रिक वाङ्मय अत्यन्त ही विशाल एवं समृद्ध है। यह जितना वैदिक काल में प्रचलित था उससे भी अधिक आज प्रचलित है। यद्यपि वर्तमान समय में अनेक तान्त्रिक ग्रन्थों का प्रकाशन हो रहा है, किन्तु इसका बहुत बड़ा भाग हस्तलिखित पाण्डुलिपियों के रूप में देश के तथा विदेशों के पुस्तकालयों में अमुद्रित रूप में सुरक्षित हैं। अनेक ग्रन्थों का तो केवल नाम ही लिखा हुआ मिलता है उनकी पाण्डुलिपियाँ आज हमें प्राप्त नहीं होती है। इस सम्पूर्ण तान्त्रिक साहित्य को सुविधा की दृष्टि से हम चार प्रधान भागों में इस प्रकार विभाजित कर सकते हैं-
(१) सैद्धान्तिक तान्त्रिक ग्रन्थ। (२) मन्त्रप्रयोगात्मक तान्त्रिक ग्रन्थ।
(३) यन्त्रप्रयोगात्मक तान्त्रिक ग्रन्थ। (४) मन्त्रौषधिप्रयोगात्मक तान्त्रिक ग्रन्थ।
Author : Ajay Kumar Uttam
Publisher : Bharatiya Vidya Sansthan
Language : Sanskrit & Hindi
Edition : 2004
Pages : 84
Cover : Paper Back
ISBN : 81-87415-51-7
Size : 12 x 2 x 19 ( l x w x h )
Weight :
Item Code : BVS 0058