Brihat Samhita Set of 2 Vols. (बृहत्संहिता 2 भागो मे)
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Prof. Sadanand Shukla - Sanskrit & Hindi - Bharatiya Vidya Sansthan
Brihat Samhita Set of 2 Vols. (बृहत्संहिता 2 भागो मे)
बृहत्संहिता 2 भागो मे (Brihat Samhita Set of 2 Vols.)
वेदा हि यज्ञार्यमभित्रवृत्ताः कालादिपूर्वा विहिताच यज्ञाः।
तस्मादिदं कालविधानशास्त्रं यो ज्योतिषं वेद स वेद यज्ञम् ।।
ज्योतिष शास्त्र का ज्ञान प्राचीन काल से ही मनुष्यों के लिये अतीव उपयोगी सिद्ध होता आया है। सृष्टि के आरम्भ में ही वेद यज्ञ के लिए प्रवृत्त हुये। यज्ञ का सम्पादन काल-समय-मुहूर्त आदि का निर्णय करने वाले ज्योतिष शात्र को जो जानता है, वही यश का ज्ञाता होता है। लोक में किसानों को यदा ही इस बात की चिन्ता बनी रहती है कि वर्षा कब होगी। पूजा के अधिकारियों को शुभ मुहूर्त की चिन्ता बनी रहती है कि कब शुभ मुहूर्त आवे तो दीर्घ सत्र का आरम्भ किया जाय। प्राचीन काल में साल-साल भर तक यज्ञ चला करते थे। इसलिए यह जानना अति आवश्यक था कि वर्ष में कितने दिन होते है? वर्ष कब आरम्भ होता है? और कब समाप्त होता है? स्पष्ट है कि इस चराचर जगत् की सभ्य तथा असभ्य दोनों ही जातियों के लिये इस ज्योतिष शास्त्र का सामान्य ज्ञान होना आवश्यक है।
Author : Prof. Sadanand Shukla
Publisher : Bharatiya Vidya Sansthan
Language : Sanskrit & Hindi
Edition : 2011
Pages : 1440
Cover : Paper Back
ISBN : 81-87415-99-1
Size : 14 x 7 x 21 ( l x w x h )
Weight : 1.42kg
Item Code : BVS 0017